दोस्तों इस पाठ में आपको Class 10 Sanskrit Chapter 8 Kramvir katha (कर्मवीर कथा) पाठ के सभी प्रश्नों मौखिक, लिखित, 1 अंक स्तरीय, 2 अंक स्तरीय तक की बिहार बोर्केड मैट्रिक परीक्षा में संस्कृत विषय में 8 प्रश्न प्रत्येक प्रश्न 2 अंको का यानि कुल 16 अंकों का प्रश्न हिन्दी में लिखने के लिए पूछा जाता है उन प्रश्नों का उत्तर भी बिल्कुल आसान भाषा में दिया गया है जो आपको इस पोस्ट के नीचे मिल जायेगा, जिसे पढ़ कर आप अपनी पढाई को और बेहतर कर सकते हो और बोर्ड परीक्षा में अच्छे नंबर ला सकते हो |अगर आप गणित विषय की तैयारी करना चाहते है तो हमारे Youtube Channel Unlock Study पर जाकर कर सकते हैं।
10th Class Canskrit Chapter 8 Question Answer
अष्टमः पाठः कर्मवीर कथा पाठ का सारांश
(पाठेऽस्मिन् समाजे दलितस्य ग्रामवासिनः पुरुषस्य कथा वर्तते। कर्मवीरः असौ निजोत्साहेन विद्यां प्राप्य महत्पदं लभते, समाजे च सर्वत्र सत्कृतो भवति। कथाया मूल्यं वर्तते यत् निराशो न स्यात्, उत्साहेन सर्वं कर्तुं प्रभवेत्।)
अर्थ-इस पाठ में समाज में दलित ग्रामवासी पुरुष का कहानी है। वह कर्मवीर अपने उत्साह के द्वारा विद्या प्राप्त करके महान् पद पाता है। और समाज में सभी जगह सम्मानित होता है। कथा का मूल्य है-निराश नहीं होना चाहिए, उत्साह के द्वारा सबकुछ करना चाहिए।
अस्ति विहारराज्यस्य दुर्गमप्राये प्रान्तरे ‘भीखनटोला’ नाम ग्रामः। निवसन्ति स्म तत्रातिनिर्धनाः शिक्षाविहीनाः क्लिष्टजीवनाः जनाः। तेष्वेवान्यतमस्य जनस्य परिवारो ग्रामाद् बहिः स्थितायां कुट्यां न्यवसत्। कुटी तु जीर्णप्रायत्वात् परिवारजनान् आतपमात्राद् रक्षति, न वृष्टेः। परिवारे स्वयं गृहस्वामी, तस्य भार्या तयोरेकः पुत्रः कनीयसी दुहिता चेत्यासन्।
अर्थ-बिहार राज्य के “भीखनटोला” नामक ग्राम है जहाँ पहुँचना लगभग कठिन है। वहाँ अतिनर्धन अशिक्षित कठिनाई से जीवन जीने वाले लोग रहते हैं। उनलोगों में ही एक अन्य जन का परिवार गाँव से बाहर झोपड़ी में रहता था। झोपड़ी तो जर्जर होने से परिवार जनों को मात्र धूप से रक्षा करता है, वर्षा में नहीं। परिवार में स्वयं घर के मालिक उनकी पत्नी उनदोनों के एक पुत्र और छोटी पुत्री थी।
तस्माद् ग्रामात्ः क्रोशमात्रदूरं प्राथमिको विद्यालयः प्रशासनेन संस्थापितः। तत्रैको नवीनदृष्टिसम्पन्नः सामाजिकसामरस्यरसिकः शिक्षकः समागतः। भीखनटोलां दष्टुमागतः स कदाचित् खेलनरत्तं दलितबालकं विलोक्य तस्यापातरमणीयेन स्वभावेनाभिभूतः। शिक्षकं बालकमेनं स्वविद्यालयमानीय स्वयं शिक्षितुमारभत। बालकोऽपि तस्य शिक्षणशैल्याकृष्टः शिक्षाकर्म जीवनस्य परमा गतिरिति मन्यमानो निरन्तरमध्यवसायेन विद्याधिगमाय निरतोऽभवत्। क्रमशः उच्चविद्यालयं गतस्तस्यैव शिक्षकस्याध्यापनेन स्वाध्यवसायेन चः प्राथम्यं प्राप। ‘छात्राणामध्ययनं तपः’ इति भूयोभूयः स्वविद्यागुरुणोपदिष्टोऽसौ बालकः पित्रोरर्थाभावेऽपि छात्रवृत्त्या कनीयश्छात्राणां शिक्षणलब्धेन धनेन च नगरगते महाविद्यालये प्रवेशमलभत।
अर्थ-उस गाँव से कोस भर की दूरी पर प्रशासन द्वारा स्थापित प्राथमिक विद्यालय है। वहाँ एक दृष्टि से सम्पन्न सामाजिक समरसता के पक्षपाती शिक्षक आये। एकबार वे भीखनटोला देखने के लिए आये खेलने में मग्न दलित बालकों को देखकर उसके सहज आकर्षक स्वभाव से प्रभावित हुए। शिक्षक इस बालक को अपने विद्यालय में लाकर स्वयं पढ़ाने लगे। बालक भी उनके शिक्षण शैली से आकृष्ट होकर शिक्षाकर्म जीवन का परम गति ऐसा मानते हुए लगातार परिक्षण द्वारा विद्यालय के लिए तत्पर था। क्रम से उच्च विद्यालय में गया उसके ही शिक्षक के पढ़ाने से औरस्वयं परिक्षण से प्रथम स्थान प्राप्त किया। “छात्रों का तपस्या अध्ययन” ऐसा बार-बार अपने गुरू के उपदेश से वह बालक पिता के धन अभाव में भी छोटे बच्चों को पढ़ाकर और धन प्राप्त करके शहर में महाविद्यालय में प्रवेश प्राप्त किया।
तत्रापि गुरूणां प्रियः सन् सततं पुस्तकालये स्ववर्गे चचं सदावहितचेतसा अकृतकालक्षेपः स्वाध्यायनिरतोऽभूत्। महाविद्यालयस्य पुस्तकागारे बहूनां विषयाणां पुस्तकानि आत्मसादसौ कृतवान्। तत्र स्नातकपरीक्षायां विश्वविद्यालये प्रथमस्थानमवाप्य स्वमहाविद्यालयस्य ख्यातिमवर्धयत्। सर्वत्र रामप्रवेशराम इति शब्दः श्रूयते स्म नगरे विश्वविद्यालयपरिसरे च। नाजानतां पितरावस्य विद्याजन्यां प्रतिष्ठाम्।
अर्थ-वहाँ भी गुरूओं का प्रिय लगातार पुस्तकालय में और अपने वर्ग में सावधान मन से समय न गँवानेवाला अपने अध्ययन में तत्पर था। वह महाविद्यालय के पुस्तकालय में अनेक विषयों – को पुस्तकों को आत्मसात् किया। वह स्नातक परीक्षा में विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया अपने महाविद्यालय का प्रतिष्ठा बढ़ाया। सभी जगह रामप्रवेश राय ऐसा शब्द सुनते शहर में और विश्वविद्यालय परिसर में इसके पिता को नहीं जानते हुए विद्या जानने से प्रतिष्ठित् हुआ।
वर्षान्तरेऽसौ केन्द्रीयलोकसेवापरीक्षायामपि स्वाध्यवसायेन व्यापकविषयज्ञानेन च उन्नतं स्थानमवाप। साक्षात्कारे च समितिसदस्यास्तस्य व्यापकेन ज्ञानेन, तत्रापि तादृशे परिवारपरिवेशे कृतेन श्रमेणाभ्यासेन च परं प्रीताः अभूवन् ।
अर्थ- वह दूसरे केन्द्रीय लोकसेवा परीक्षा अपने परिश्रम के द्वारा और व्यापक विषय ज्ञान से उच्च स्थान प्राप्त किया। साक्षात्कार में भी समिति सदस्य का उसके व्यापक ज्ञान से वहाँ भी पारिवारिक परिवेश और परिश्रम के द्वारा अभ्यास से बहुत प्रसन्न हुए।
अद्य रामप्रवेशरामस्य प्रतिष्ठा स्वप्रान्ते केन्द्रप्रशासन च प्रभूता वर्तते। तस्य प्रशासनक्षमतां संकटकाले च निर्णयस्य सामर्थ्य सर्वेषामावर्जके वर्तेते। नूनमसौ कर्मवीरो व्यतीत्य बाधाः प्रशासनकेन्द्रे लोकप्रियः संजातः। सत्यमुक्तम् उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः।
अर्थ- आज रामप्रवेशराम का सम्मान अपने प्रान्त और केन्द्रीय प्रशासन में बहुत अधिक है। उसके प्रशासन क्षमता और संकटकाल में निर्णय का सामर्थ्य सभी को आकर्षित करता है। वह निश्चय ही कर्मवीर बाधाओं को बिताकर प्रशासन केन्द्र में लोकप्रिय हो गया। सत्य कहा गया है-परिश्रम करने वाले सिंह के समान पुरूष लक्ष्मी प्राप्त करते हैं।
– वस्तुनिष्ठ प्रश्न
1. कर्मवीर कौन था?
(A) रामप्रवेश राम
(B) दुर्योधन
(C) अर्जुन
(D) वीरेश्वर
(A) रामप्रवेश राम
2. ‘छात्राणाम् तपः।’ रिक्त स्थान में कौन पद होगा?
(A) शयनम्
(B) भ्रमणम्
(C) अध्ययनम्
(D) ध्यानम्
(C) अध्ययनम्
3. ‘कर्मवीर कथा’ पाठ में किसकी कथा है?
(A) रामप्रवेश राम
(B) श्याम प्रवेश राम
(C) गणेश प्रवेश राम
(D) घनश्याम राम
(A) रामप्रवेश राम
4. रामप्रवेश राम ने उच्च विद्यालय में कौन-सा स्थान प्राप्त किया?
(A) पाँचवा
(B) तीसरा
(C) दूसरा
(D) पहला
(D) पहला
5. भीखनटोला देखने कौन आया था?
(A) प्रशासन
(B) अध्यापक
(C) नेता
(D) साधु
(B) अध्यापक
6. लक्ष्मी किसके पास रहती है?
(A) परिश्रमी
(B) बान्धवः
(C) बुद्धिमान्
(D) साहित्यिकः
(A) परिश्रमी
7. भीखनटोला गाँव कहाँ है?
(A) उत्तरप्रदेश
(B) बिहार
(C) नेपाल
(D) बंगाल
(B) बिहार
8. रामप्रवेश राम को ‘छात्राणाम् अध्ययनं तपः’ का उपदेश किसने दिया ?
(A) पिता
(B) साथी
(C) गुरु
(D) माता
(C) गुरु
9. रामप्रवेश राम का जन्म किस गाँव में हुआ था?
(A) लालजी टोला
(B) गाँधी टोला
(C) मुरली टोला
(D) भीखन टोला
(D) भीखन टोला
10. रामप्रवेश राम किस परीक्षा में विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया था?
(A) स्नातक
(B) अन्तर्नातक
(C) स्नातकोत्तर
(D) प्रवेशिका
(A) स्नातक
11. प्रशासन ने भीखनटोला से एक कोस की दूरी पर क्या स्थापित किया?
(A) मध्य विद्यालय
(B) अस्पताल
(C) प्राथमिक विद्यालय
(D) महाविद्यालय
(C) प्राथमिक विद्यालय
12. कर्मवीर रामप्रवेश राम के परिवार के सदस्यों की कुल संख्या कितनी थी?
(A) चार
(B) छह
(C) आठ
(D) दस
(A) चार
13. ‘उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः’ उक्ति किस पाठ से ली गई है?
(A) कर्मवीर कथा
(B) स्वामी दयानन्दः
(C) पाटलिपुत्र वैभवम्
(D) अलसकथा
(A) कर्मवीर कथा
14. दलित ग्रामवासी पुरुष की कथा कौन है?
(A) कर्मवीर कथा
(B) अलस कथा
(C) व्याघ्रपथिक कथा
(D) विश्वशांतिः
(A) कर्मवीर कथा
15. ‘कनीयसी’ पद का अर्थ है
(A) बड़ी
(B) छोटी
(C) पत्नी
(D) पुत्री
(B) छोटी
16. रामप्रवेश राम किसको जीवन की परम गति मानकर अध्ययन में जुट गया?
(A) शिक्षा कर्म
(B) धर्म कर्म
(C) अहिंसा
(D) सत्कर्म
(A) शिक्षा कर्म
17. ‘उद्योगिनं पुरुषसिंड उपैति ।’ रिक्त स्थान की पूर्ति उचित विकल्प से करें।
(A) कष्टम्
(B) क्रोधम्
(C) शीलम्
(D) लक्ष्मीः
(D) लक्ष्मीः
18. ‘कर्मवीरकथा’ में बालक किसकी शिक्षण-शैली से आकृष्ट हुआ?
(A) शिक्षक
(B) पिता
(C) माता
(D) प्राचार्य
(A) शिक्षक
19. ‘कर्मवीर कथा’ में प्रशासन के क्षेत्र में कौन लोकप्रिय हुआ?
(A) नवीन दृष्टि सम्पन्न शिक्षक
(B) राम प्रवेश राम
(C) राम प्रवेश राम के गुरु
(D) राम प्रवेश राम के पिता
(B) राम प्रवेश राम
20. रामप्रवेश राम ने अनेक विषयों की पुस्तकों को कहाँ आत्मसात किया?
(A) प्राथमिक विद्यालय के पुस्तकालय में
(B) उच्च विद्यालय के पुस्तकालय में
(C) महाविद्यालय के पुस्तकालय में
(D) विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में
(C) महाविद्यालय के पुस्तकालय में
21. भीखन टोला गाँव से प्रशासन द्वारा स्थापित प्राथमिक विद्यालय कितनी दूर था?
(A) एक कोश
(B) आधा कोश
(C) डेढ़ कोश
(D) दो कोश
(A) एक कोश
22. ‘उपैति’ पद का अर्थ होता है
(A) प्राप्त करता है।
(B) जाता है।
(C) पढ़ता है।
(D) घूमता है।
(A) प्राप्त करता है।
23. ………..परीक्षायाम् अहं प्रथमं स्थानं प्राप्तवान्”- रिक्त स्थान की पूर्ति उचित विकल्प से करें।
(A) वार्षिकी
(B) वार्षिकः
(C) वार्षिक्याम्
(D) वार्षिकम्
(C) वार्षिक्याम्
24. शिक्षक दलित बालक को कहाँ ले गये?
(A) क्षेत्र
(B) घर
(C) विद्यालय
(D) आश्रम
(C) विद्यालय
25. दलित बालक का नाम क्या था?
(A) प्रवेश राम
(B) शिवराम
(C) रामप्रवेश राम
(D) रामजनम राम
(C) रामप्रवेश राम
संस्कृत में उत्तर दें
1. कर्मवीरः कः अस्ति?
उत्तर :- रामप्रवेशरामः कर्मवीरः अस्ति।
2. कर्मवीरः के स्थानम् अवाप ?
उत्तर :-कर्मवीरः उन्नतं स्थानम् अवाप।
3. बालकः कस्य शिक्षणशैल्याकृष्टः ।
उत्तर :-बालकः नवीनदृष्टिसंपन्नः शिक्षकस्य शिक्षणशैल्याकृष्टः ।
4. रामप्रवेशस्य ग्रामस्य नाम किं अस्ति ?
उत्तर :-रामप्रवेशस्य ग्रामस्य नाम भीखनटोला आसीत्।
5. ‘भीखना टोला’ ग्राम कुत्र अस्ति?
उत्तर :-भीखना टोला ग्राम बिहारप्रान्तस्य दुर्गमप्राये प्रान्तरे अस्ति।
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. रामप्रवेश राम किससे प्रभावित होकर अध्ययन में निरत हो गया?
उत्तर :-रामप्रवेश राम भीखनटोला गाँव के रहनेवाले एक दलित बालक हैं। उस बालक को एक शिक्षक ने अपने विद्यालय में लाकर शिक्षा देना प्रारंभ किया। बालक रामप्रवेश राम शिक्षक की शिक्षणशैली से आकृष्ट हुए। उन्होंने शिक्षा को जीवन की परम गति माना। वे विद्या अध्ययन में रात-दिन लग गए और अपने वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त करने लगे।
2. राम प्रवेश राम के जीवन से क्या शिक्षा मिलती है?
अथवा, कर्मवीर कौन था एवं उसके जीवन से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :- राम प्रवेश राम भीखनटोला गाँव के रहनेवाले एक दलित बालक थे। उस बालक को एक शिक्षक ने अपने विद्यालय में लाकर शिक्षा देना प्रारंभ किया। बालक राम प्रवेश राम शिक्षक की शिक्षणशैली से आकृष्ट हुए। उन्होंने शिक्षा की जीवन की परम गति माना। वे विद्या अध्ययन में रात-दिन लग गए और अपने वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त करने लगे।
अथवा, कर्मवीर एक ऐसे प्रतिभाशाली कर्मनिष्ठ बालक है जो निर्धनता एवं दलित जाति में जन्म लेकर भी उच्च पद पर आसीन हो जाता है। उसके जीवन से, हमें यह शिक्षा मिलती है कि गाँव में रहनेवाले दलित एवं निर्धन छात्र भी मेहनत के बल पर सर्वोच्च शिखर पर पहुँच सकते हैं। इससे हमें मेहनती बनकर सफलता प्राप्त करने की शिक्षा मिलती है।
3. रामप्रवेश राम का घर कहाँ था और कैसा था?
उत्तर :-राम प्रवेश का घर बिहार राज्य अन्तर्गत ‘भीखनटोला’ नामक गाँव में हुआ था। यहाँ के लोग प्रायः निर्धन और अशिक्षित हैं। कुछ अत्यंत निर्धन परिवार गाँव के बाहर टूटी-फूटी झोपड़ियों में रहते हैं। भीखनटोला से लगी एक कोस की दूरी पर एक प्राथमिक विद्यालय है।
4. रामप्रवेश की प्रतिष्ठा कहाँ-कहाँ देखी जा रही है?
उत्तर :- रामप्रवेश की प्रतिष्ठा अपने प्रांत में और केन्द्रीय प्रशासन में देखी जा रही है।
5. ‘शिक्षा कर्म जीवनस्य परमगतिः’ रामप्रवेश राम पर घटित होता है? उपरोक्त कथन कैसे
उत्तर :-रामप्रवेश राम शिक्षा ही जीवन की परम गति होती है, ऐसा मानता हुआ अपने परिश्रम से विद्या लाभ के लिए परिश्रम करने लगा। अपने परिश्रम से उसने विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय स्तर पर सभी परीक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त किया। अपने परिश्रम के कारण वे केन्द्रीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में भी सफल रहे।
6. ‘कर्मवीर क्या’ से क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :- कर्मवीर से हमें यही शिक्षा मिलती है कि अपनी निष्ठा, परिश्रम, सेवाभाव से ही मनुष्य परमपद को प्राप्त कर सकता है। रामप्रवेशराम अभावग्रस्त दलित जाति में जन्म लेकर भी प्रबल इच्छाशक्ति के कारण उच्चपद प्राप्त किये हैं। उनका जीवनपथ निश्चय ही आदर्श है। हमें भी प्रबल इच्छाशक्ति को अपनाकर जीवनपथ पर ‘अग्रसरित’ होना चाहिए।
7. रामप्रवेश का जन्म कहाँ हुआ था? उन्होंने देश की सेवा से कैसे यश अर्जित की?
उत्तर :- राम प्रवेश का जन्म बिहार राज्य अन्तर्गत ‘भीखनटोला’ नामक गाँव में हुआ था। वे पुस्तकालयों में अनेक विषयों की पुस्तकों का अध्ययन किया करते थे। वे अध्ययन को छात्रों की पूजा मानते थे। अपने परिश्रम के परिणामस्वरूप केंद्रीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने में वे सफल रहे।
8. ‘कर्मवीर कथा’ का सारांश लिखें।
उत्तर :-बिहार राज्य में दुर्गम क्षेत्र में एक सुविधाविहीन गाँव भीखनटोला है, जहाँ दलित, निर्धन बालक रामप्रवेश राम रहता था। संयोग से उस गाँव में नवीन दृष्टिसम्पन्न एवं सामाजिक समतामूलक शिक्षक आए तथा रामप्रवेश राम को पढ़ने के लिए प्रेरित किए। दलित बालक उस शिक्षक से प्रेरित होकर अपने लगन, परिश्रम तथा जिज्ञासा के बल पर सभी परीक्षाओं में महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया। केन्द्रीय प्रशासनिक सेवा में भी महत्त्वपूर्ण पद एवं प्रतिष्ठा प्राप्त किए। इस प्रकार, इस कथा से स्पष्ट होता है कि सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने के लिए घनी और उन्च वर्ग में जन्म लेने की आवश्यकता नहीं है।
9. ‘कर्मवीर कथा’ के आधार पर रामप्रवेश राम के परिवार का वर्णन करें।
उत्तर :- ‘कर्मवीर कथा’ का प्रमुख पात्र रामप्रवेश राम है। उनके परिवार में गृहस्वामी पति-पत्नी पुत्र तथा पुत्री थे। रामप्रवेश राम दलित परन्तु लगनशील और पश्चिमी बालक थे।
10. रामप्रवेश राम के महाविद्यालयीय शिक्षा के बारे में लिखें।
उत्तर :- महाविद्यालय में प्रवेश के बाद रामप्रवेश बहुत ही मन लगाकर पढ़ने लगा। वह दलित मगर लगनशील और परिश्रमी था। घन के अभाव में भी आध्ययनरत रहा। महाविद्यालय की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उसने केन्द्रीय लोक सेवा आयोग की परीक्षा में उत्तीर्ण होकर समाज के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया।
11. रामप्रवेश राम की शैक्षणिक उपलब्धियों पर प्रकाश डालें।
उत्तर :-कभी खेलकूद में व्यस्त रहने वाले रामप्रवेशराम गुरु का मार्गदर्शन पाकर विद्या अध्ययन में लग गये। गुरु का आशीर्वाद और कड़ी मेहनत ही उनकी सफलता की सीढ़ी बनी। पैसों की कमी के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। स्कूल स्तर से ही वे प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करते रहे।
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